हम आपकी ऊँचाई कैसे निकालते हैं
यह पेज दो मान दिखा सकता है। अच्छा है कि आप जानें कि हर एक क्या मापता है:
- ज़मीन की ऊँचाई। आपकी पोज़िशन पर ज़मीन की सतह की ऊँचाई, लगभग 30 मीटर रेज़ोल्यूशन वाले वैश्विक डिजिटल एलिवेशन मॉडल के अनुसार। यह आपके GPS की गुणवत्ता पर निर्भर नहीं करती और बड़े अंकों में दिखती है।
- आपके GPS के अनुसार ऊँचाई। डिवाइस इसे सैटेलाइट सिग्नल से निकालता है। यह सिर्फ़ उन फ़ोन और टैबलेट पर दिखती है जो इसे सपोर्ट करते हैं, अपनी गलती की सीमा के साथ।
अनुमति देने से पहले आपके इलाके की अनुमानित ऊँचाई दिखती है। सटीक लोकेशन मिलने पर मान ठीक उस पॉइंट का होता है, जहाँ आप हैं।
किसी दूसरी जगह की ऊँचाई देखें
किसी गाँव, पहाड़ की चोटी, ट्रेक के पड़ाव या अपने घर की ऊँचाई वहाँ गए बिना जानने के लिए, सर्च बॉक्स में उसका नाम या पता लिखें, या मैप को ज़ूम करके पॉइंट पर टैप करें। दिखाया गया मान उस पॉइंट पर ज़मीन की ऊँचाई है; ढलान वाले इलाकों में यह एक गली से दूसरी गली में बदल सकता है।
नतीजा कितना सटीक है?
मैदानी इलाकों में दोनों मानों में आमतौर पर कुछ ही मीटर का फ़र्क़ होता है। पहाड़ों, सँकरी घाटियों या खड़ी चट्टानों के पास एलिवेशन मॉडल हर खाने की ज़मीन का औसत लेता है, इसलिए फ़र्क़ ज़्यादा हो सकता है। GPS भी ऊँचाई को क्षैतिज पोज़िशन से कम सटीकता से मापता है: ऊँचाई में गलती आमतौर पर पोज़िशन की गलती की 1.5 से 3 गुना होती है। ऊँची इमारत में याद रखें कि ज़मीन की ऊँचाई नीचे सड़क की ऊँचाई है, आपकी मंज़िल की नहीं।
भारत के कुछ शहरों और जगहों की ऊँचाई
| जगह | मीटर | फुट |
|---|---|---|
| लेह | 3,500 | 11,483 |
| शिमला | 2,200 | 7,218 |
| दार्जिलिंग | 2,042 | 6,699 |
| बेंगलुरु | 920 | 3,018 |
| पुणे | 560 | 1,837 |
| दिल्ली | 216 | 709 |
| लखनऊ | 123 | 404 |
| मुंबई | 14 | 46 |
| कोलकाता | 9 | 30 |
ऊपर दिए मान हर जगह के केंद्र के लिए अनुमानित हैं।
ऊँचाई जानना किन कामों में आता है
- ऊँचाई पर सेहत। लगभग 2,500 मीटर से ऊपर कुछ लोगों को सिरदर्द, थकान या साँस फूलने की शिकायत होती है। लेह-लद्दाख या हिमालय के ट्रेक से पहले ऊँचाई जानकर आप शरीर को ढलने का समय (acclimatization) प्लान कर सकते हैं।
- ट्रेकिंग और साइकिलिंग। चढ़ाई का अंतर देखने या यह पक्का करने के लिए कि आप पड़ाव या चोटी तक पहुँच गए हैं।
- बाढ़ और जलभराव। घर की समुद्र तल से ऊँचाई तटीय या नदी किनारे के इलाकों में पानी भरने के खतरे का पहला अंदाज़ा देती है।
- खेती और बागवानी। ऊँचाई से तापमान और फ़सल तय होती है, जैसे चाय, कॉफ़ी या सेब।
- ड्रोन और खेल। उड़ान की ऊँचाई की सीमा और शरीर का प्रदर्शन शुरुआती पॉइंट की ऊँचाई पर निर्भर करते हैं।
ऊँचाई के साथ सही पॉइंट दर्ज करने के लिए अपने अक्षांश और देशांतर भी कॉपी करें। पूरा मैप मेरी अभी की लोकेशन पर है।
ऊँचाई के बारे में आम सवाल
अपनी लोकेशन की ऊँचाई कैसे जानें?
पेज खुलते ही आपके इलाके की अनुमानित ऊँचाई दिखाता है। ठीक उस पॉइंट की ऊँचाई के लिए, जहाँ आप हैं, “मेरी सटीक लोकेशन दिखाएँ” पर टैप करें: ऊँचाई समुद्र तल से मीटर और फुट में दिखेगी।
समुद्र तल से ऊँचाई का क्या मतलब है?
यह बताती है कि ज़मीन औसत समुद्र तल से कितनी ऊपर है। 920 मीटर का मतलब है कि उस पॉइंट पर ज़मीन औसत समुद्र तल से 920 मीटर ऊँची है।
अपने घर या किसी दूसरी जगह की ऊँचाई कैसे देखें?
सर्च बॉक्स में पता या जगह का नाम लिखें, या मैप पर पॉइंट पर टैप करें। उस पॉइंट पर ज़मीन की ऊँचाई बड़े अंकों में, मीटर और फुट में, दिखेगी।
क्या Google Maps में ऊँचाई दिखती है?
Google Maps किसी पॉइंट की ऊँचाई नहीं दिखाता। “Terrain” लेयर सिर्फ़ कंटूर लाइनें दिखाती है। Google Earth चुनी गई जगह की ऊँचाई दिखाता है। यह पेज सीधे मान देता है, आपकी लोकेशन के लिए या मैप पर टैप किए किसी भी पॉइंट के लिए।
दो अलग-अलग ऊँचाइयाँ क्यों दिख रही हैं?
एक एलिवेशन मॉडल से ज़मीन की ऊँचाई है। दूसरी डिवाइस के GPS से निकाली गई है; इसमें ज़मीन से आपकी ऊँचाई भी शामिल होती है, जैसे ऊपरी मंज़िल पर होने पर, और इसकी गलती की सीमा ज़्यादा होती है।
ऊँचाई कितनी सटीक है?
ज़मीन की ऊँचाई मैदानी इलाकों में आमतौर पर 5 से 10 मीटर तक सही होती है, खड़ी ढलानों पर थोड़ी कम। फ़ोन के GPS की ऊँचाई एक माप से दूसरे माप में 10 से 20 मीटर तक बदल सकती है।